
Maharashtra civic body election results: महाराष्ट्र के निकाय चुनावों में भगवा ब्रिगेट यानी बीजेपी और असली शिवसेना (एकनाथ शिंदे) की महायुति की आंधी में न सिर्फ उद्धव सेना (उबाटा) बल्कि एनसीपी, एनसीपी (शचंप) और कांग्रेस सब हवा में उड़ गया. बीजेपी नेता महाराष्ट्र की जनता का आभार जताते नहीं थक रहे हैं वहीं विपक्ष यानी महाविकास अघाड़ी (कांग्रेस, उद्धव सेना यूबीटी और एनसीपी शप) में नतीजों को लेकर कलह मची हुई है. उद्धव सेना के संजय राउत और उद्धव के चचेरे ब्रदर मनसे वाले राज ठाकरे की प्रतिक्रिया के बाद कांग्रेस ने नतीजों का ठीकरा ईवीएम के सिर फोड़ा है. कांग्रेस ने नतीजों को लेकर अपनी प्रतिक्रिया में क्या कहा, खुद जान लीजिए.
मुंबई में उद्धव ठाकरे की पार्टी उद्धव सेना (उबाटा) अपना आखिरी गढ़ बीएमसी तो नहीं बचा पाई लेकिन अपनी लाज बचाने में जरूर कामयाब रही. नतीजों पर उद्धव के भाई राज ठाकरे ने शनिवार सुबह ट्वीट करके अपने बंदों को काम पर लौटने का संदेश दिया. जबकि अजित पवार ने तो शुक्रवार की शाम को ही नतीजों को जनता का आदेश बताते हुए स्वीकार किया था. गैस लाइटिंग कहकर चुनाव आयोग को घेर चुके राहुल गांधी की सोशल मीडिया पर पोस्ट के बाद महाराष्ट्र कांग्रेस ने हार का ठीकरा ईवीएम के मत्थे फोड़ा है.
लातूर कैसे जीते?
निकाय चुनाव में करारी शिकस्त के बाद महाराष्ट्र कांग्रेस ने मांग उठाई है कि राज्य में जिला परिषद और पंचायत समिति के चुनाव बैलेट पेपर पर कराए जाएं। कांग्रेस के नेता नाना पटोले ने इस संबंध में राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने ईवीएम को लेकर भी सवाल उठाए हैं. नाना पटोले ने कहा कि ईवीएम से भरोसा उठ गया है. नगर निगम चुनावों में हुई गड़बड़ी की वजह से चुनावी प्रक्रिया में जनता का भरोसा कम हुआ है. वीवीपैट का इस्तेमाल न होना पारदर्शिता पर सवाल उठाता है. ये चुनावी उदासीनता नहीं, प्रशासनिक अक्षमता है इसलिए अब लोकतंत्र को बचाने के लिए बैलेट पेपर का इस्तेमाल फिर से शुरू किया जाना चाहिए.
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हालांकि ये कहते हुए वो ये भूल गए कि उसी ईवीएम से उनकी पार्टी ने लातूर को फतह किया है और बीएमसी में भी उनके कुछ नगर सेवक यानी पार्षद चुने गए हैं.
व्यवस्था पर सवाल
पटोले ने आगे लिखा, ‘वोटर लिस्ट में गड़बड़ी, मतदाताओं को मतदान केंद्र ढूंढने के लिए घंटों का इंतजार और आखिर में हजारों लोगों का बिना वोट दिए लौट जाना. ये निर्वाचन आयोग की नाकामी बताता है. ये स्थिति लोकतंत्र के लिए खतरनाक है कुछ राज्यों ने लोगों का भरोसा बरकरार रखने और विवादों से बचने के लिए स्थानीय निकाय चुनाव ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर पर कराने का फैसला किया है. तो महाराष्ट्र में ईवीएम पर इतना जोर क्यों? यह मजबूरी किसके फायदे के लिए है? यही सवाल आज आम वोटर पूछ रहा है.
पटोले के मुताबिक जिला परिषद और पंचायत समिति ग्रामीण लोकतंत्र की रीढ़ हैं. अगर इनमें भी अविश्वास और कुप्रबंधन का माहौल दिखा, तो राज्य की लोकतांत्रिक सेहत पर बुरा असर पड़ेगा. इसलिए आने वाले जिला परिषद और पंचायत समिति के चुनाव बैलेट पेपर पर ही होने चाहिए. (IANS)

