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Features of Indian anti-ship hypersonic missile: चार दिन बाद देश गणतंत्र दिवस मनाएगा. ये दिन देशभक्ति और गर्व का प्रतीक है. कर्तव्य पथ पर सजती गणतंत्र दिवस परेड हमें हमारी संस्कृति, एकता और प्रगति की झलक दिखाती है. 2026 का 26 जनवरी..किस तरह सबसे अलग होगा, नया होगा, खास होगा. इस बार कर्तव्य पथ पर भारत का हाइरपरसोनिक दर्शन होगा. एक ऐसा हथियार इस बार परेड का हिस्सा होगा जिसका नाम सुनने भर से पाकिस्तान ही नहीं चीन के भी पसीने छूटेंगे. सबसे पहले आपको भारत के उस हाइपरसोनिक हथियार के बारे में जानना चाहिए जो पहली बार गणतंत्र दिवस परेड का हिस्सा बनने वाला है.

दुश्मन के युद्धपोतों को उड़ाने वाली हाइपरसोनिक मिसाइल

इस बार गणतंत्र दिवस परेड के मौके पर भारत की नई लॉन्ग रेंज एंटी-शिप मिसाइल यानी LR-ASHM मुख्य आकर्षण होगी. भारतीय नौसेना की समुद्री ताकत को नए स्तर पर ले जाने वाली ये मिसाइल समंदर में दुश्मन का काल बनने वाली है. ये भारत के समुद्री क्षेत्र को कैसे सुरक्षित करेगी. ये समझने के लिए आपको इसकी ताकत के बारे में जानना चाहिए.

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LR-ASHM को DRDO द्वारा विकसित किया गया है. यह अत्याधुनिक एंटी-शिप मिसाइल प्रणाली है, जिसकी रेंज 1,500 किलोमीटर से अधिक है. इस मिसाइल की खासियत है कि ये दुश्मन के डिफेंस सिस्टम के दायरे में आए बिना ही हमला कर सकती है. नौसेना इसे सुरक्षित दूरी से लॉन्च कर सकती है और बड़े युद्धपोतों को सटीक निशाना बना सकती है.

कई गुणा बढ़ जाएगी भारत की समुद्री शक्ति

LR-ASHM भारतीय नौसेना की Sea Control और समुद्री रणनीतिक क्षमता को बढ़ाती है. इससे हिंद महासागर क्षेत्र यानी IOR में भारत की समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक बढ़त और मजबूत होगी. ये Sea-skimming तकनीक से लैस है.. यानी ये समुद्री सतह से थोड़ी ही ऊंचाई पर उड़ान भरती है.  जिससे ये दुश्मन के रडार की पकड़ में नहीं आती है.  इसकी एक खासियत ये भी है कि ये नौसेना के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स यानी पनडुब्बी.. युद्धपोत.. हेलीकॉप्टर से भी लॉन्च की जा सकती है.

ये मिसाइल दुश्मन के युद्धपोतों को लंबी दूरी से सटीक निशाना बनाने में सक्षम है और भारत की आत्मनिर्भर रक्षा तकनीक का प्रतीक भी है. LR-ASHM के प्रदर्शन से दुनिया को ये संदेश जाएगा कि भारत समुद्री सुरक्षा और रणनीति में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है. 

इस बार गणतंत्र दिवस की सुरक्षा भी अभूतपूर्व होने वाली है.. गणतंत्र दिवस के मौके पर आतंकी हमले के इनपुट के बाद पूरी दिल्ली को अभेद्य किला बना दिया है. सुरक्षा के मद्देनजर 15 हजार जवानों को तैनात किया गया है. 10 हजार दिल्ली पुलिस के जवान और 5 हजार पैरामिलिट्री फोर्स के जवान तैनात हैं. वाहनों की चेकिंग के लिए 4 लेयर की सुरक्षा की गई है. 3000 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं. 

लद्दाख के मूक योद्दा भी करते दिखेंगे मार्च

संभावित खतरे को देखते हुए इस बार दिल्ली पुलिस के जवानों को एक खास चश्मा दिया गया है.. ये चश्मे ऐसी तकनीक से लैस हैं कि किसी भी संदिग्ध की पहचान एक नजर में कर लेंगे. 

गणतंत्र दिवस परेड में दुनिया पहली बार भारत की पशु टुकड़ी को भी मार्च करते हुए देखेगी. पहली बार सेना की रिमाउंट एंड वेटरनरी कोर यानी RVC की टुकड़ी को विशेष रूप से चुना गया है. गणतंत्र दिवस परेड में इस बार देश के दुर्गम सीमाओं की रक्षा करने वाले पशु-पक्षी भी भाग लेने वाले हैं.कठिन परिस्थितियों में देश के प्रति अपने कर्तव्य को निभाने वाले पशु-पक्षी भी कर्तव्य पथ पर सेना के जवानों के साथ कदमताल करने वाले हैं.

रीमाउंट एंड वेटरनरी कॉर्प्स की इस टुकड़ी में सबसे आगे चलेंगे दो बैक्ट्रियन यानी दो कूबड़ वाले ऊंट. इनके पीछे होंगे चार जांस्कर पोनी यानी टट्टू. साथ में होंगे चार शिकारी रैप्टर्स यानी बाज. इस टुकड़ी में आत्मनिर्भर भारत के प्रतीक भारतीय नस्ल के 10 सोल्जर डॉग्स भी शामिल होंगे. हाल ही में बैक्ट्रियन ऊंटों को लद्दाख में सेना के सारथी के तौर पर शामिल किया गया है. इन्हें लद्दाख के ठंडे इलाकों के ऑपरेशंस के लिए शामिल किया गया है. अत्यधिक ठंड, कम ऑक्सीजन और 15,000 फीट से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों के लिए अनुकूल ये ऊंट 250 किलोग्राम तक भार उठा सकते हैं.

माइनस 60 डिग्री में भी कर सकते हैं सर्वाइव

गणतंत्र दिवस परेड में ऊंटों के पीछे मार्च करेंगे जांस्कर टट्टू. ये लद्दाख की एक दुर्लभ और स्वदेशी पर्वतीय नस्ल है. आकार में छोटे होने के बावजूद ये टट्टू असाधारण सहनशक्ति के लिए जाने जाते हैं. ये 15,000 फीट से अधिक ऊंचाई और माइनस 40 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में 40 से 60 किलोग्राम वजन लेकर लंबी दूरी तय कर सकते हैं. इन्हें 2020 में सेना में शामिल किया गया है.. ये सियाचिन ग्लेशियर जैसे अत्यंत कठिन इलाकों में सेवाएं दे रहे हैं.

परेड का एक प्रमुख आकर्षण होंगे सेना के कुत्ते, जिन्हें भारतीय सेना के “मूक योद्धा” भी कहा जाता है. ये कुत्ते आतंकवाद-रोधी अभियानों, विस्फोटक और बारूदी सुरंगों की पहचान, ट्रैकिंग, पहरेदारी, आपदा राहत और खोज-बचाव अभियानों में सैनिकों का साथ देते हैं.

देसी कुत्ते भी कर्तव्य पथ पर दिखाएंगे करतब

आमतौर पर सेना में पहले विदेशी ब्रीड के कुत्तों को शामिल किया जाता था.. लेकिन आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया की सोच के तहत अब भारतीय ब्रीड के डॉग्स भी सरहदों की पहरेदारी करते हैं. गणतंत्र दिवस परेड में भारतीय सेना के मुधोल हाउंड, रामपुर हाउंड, चिप्पिपराई, कोम्बई और राजापालयम जैसी स्वदेशी नस्लों के डॉग्स मार्च करेंगे. 

कर्तव्य पथ पर परेड में चार बाज यानी रैप्टर्स भी शामिल होने वाले हैं. कर्तव्य पथ पर परेड में इन मूक योद्धाओं को शामिल करने का उद्देश्य सेना की इनोवेटिव अप्रोच को दिखाना है, जहां प्राकृतिक क्षमताओं को सैन्य उपयोग में बदला जाता है.