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Galgotias University History: AI महाकुंभ में जो ग्लोबल साउथ का सबसे बड़ा सम्मेलन है. जहां विश्वभर के तकनीकी विशेषज्ञ जुटे हैं, जहां पर हिंदुस्तान की AI शक्ति की बात हो रही है, वहां पर एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी जिसका नाम गलगोटिया यूनिवर्सिटी है, वो दूसरे के अविष्कार को अपना बताकर देश की साख पर बट्टा लगा रहा था. गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने भारत की विश्व गुरु वाली छवि पर कालिख पोतने का पाप किया है. इससे भी ज्यादा शर्मानक बात ये है कि जब देश आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस में खुद को मजबूत स्थिति में रख रहा है. तब एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी के इस महापाप को आधार बनाकर कुछ लोग. भारत की मेजबानी वाले AI सम्मेलन पर ही सवाल उठा रहे हैं. इसलिए आज हम AI समिट को डीरेल करने की और बदनाम करने की कोशिश करने वालों की वैचारिक मरम्मत करेंगे.

गलगोटिया का ‘झूठा’ आविष्कार
जिस AI के महाकुंभ में दुनियाभर के 200 से ज्यादा डेलिगेट्स शामिल हो रहे हैं, वहां पर गलगोटिया यूनिवर्सिटी को भी एक स्टॉल लगाने का अवसर मिला था. दिल्ली से सटे ग्रेटर नोएडा में ये प्राइवेट यूनिवर्सिटी है, जिसमें 40 हजार से ज्यादा छात्र पढ़ते हैं और वहां टेक्निकल, नॉन टेक्निकल दोनों मिलाकर 200 से ज्यादा प्रोग्राम की पढ़ाई होती है. देश की 15वीं सबसे बड़ी प्राइवेट यूनिवर्सिटी में इसकी जगह है. लेकिन देश की टॉप-15 यूनिवर्सिटी में शामिल गलगोटिया को AI समिट में स्टॉल लगाने का मौका मिला तो इसने अपने स्टॉल पर ड्रोन, रोबोट सबकुछ रखा था. यूनिवर्सिटी के फैकेल्टी बहुत आत्मविश्वास के साथ कैमरों के सामने झूठा दावा कर रहे थे कि ये अविष्कार उनकी यूनिवर्सिटी में हुआ है. सबसे पहले हम आपको सुनाते हैं कि एक ड्रोन को लेकर गलगोटिया यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर नेहा सिंह ने क्या दावा किया? गलगोटिया यूनिवर्सिटी की ये मैडम सबको गुमराह कर रही थीं, क्योंकि जिस आविष्कार को ये अपना बता रही थीं, वो आविष्कार इनका है ही नहीं. वो चीन का है. चीन तो ऐसे मौके तलाशता रहता है, जिससे भारत की छवि खराब की जा सके. ये मौका गलगोटिया यूनिवर्सिटी की इस मैडम ने चीन को दे दिया. चीन ने मैडम के दावे को फर्जी बताने में कोई देरी नहीं की.

चाइनीज न्यूज का दावा
इस ड्रोन का नाम, पहचान और दाम सबकुछ दिखाकर चाइनीज न्यूज के एक सोशल मीडिया हैंडल पर दावा किया गया कि गलगोटिया यूनिवर्सिटी की ये प्रोफेसर झूठ बोल रही हैं. जिसे वो गलगोटिया यूनिवर्सिटी का अविष्कार कह रही हैं, वो ड्रोन चाइनीज है. इसी प्रोफेसर ने एक रोबोट को भी गलगोटिया यूनिवर्सिटी के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का कमाल बताया था, जिसे चीन ने सबूतों के साथ खारिज कर दिया था. जब यूनिवर्सिटी का झूठ पकड़ा गया, तब वही प्रोफेसर कह रही हैं कि उनकी बातों को तोड़ मरोड़कर पेश किया गया. अपनी सफाई में विशुद्ध रूप से नेता की तरह बोलने वाली यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर ने किस आत्मविश्वास के साथ चाइनीज रोबोट को पहले अपना कहा और फिर उसी आत्मविश्वास के साथ किस तरह सफाई दी.

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प्रोफेसर का झूठ आया सामने
गलगोटिया यूनिवर्सिटी की ये प्रोफेसर एक तो सरासर झूठ बोल रही हैं. ऊपर से शब्दों का अर्थ समझा रही है. ये कम्युनिकेशन विभाग की हेड ऑफ डिपार्टमेंट हैं. ये संवाद करना पढ़ाती और सिखाती हैं. लेकिन जिस तरह ये क्लास में अपने बच्चों को संवाद पढ़ाती हैं, उसी तरह पत्रकारों से भी संवाद करने की कोशिश की. इनको लगा कि ये अपने संवाद से मीडिया को, पत्रकारों को, देश को गुमराह कर देंगी. इसलिए ये शब्द पर अधिक जोर दे रही हैं. लेकिन ये नहीं जानती कि शब्दों के चयन में हेरफेर इन्होंने ही किया. फर्जी दावे इन्होंने ही किये, जिससे बदनामी पूरे देश की हुई. गलगोटिया यूनिवर्सिटी और उनकी प्रोफेसर की वजह से भारतीय प्रतिभा का लोहा मानने वाली दुनिया में भारत की छवि को नुकसान पहुंचा है. इन्होंने दुनिया में भारत की जगहंसाई करवाई है. इन्होंने और इनकी यूनिवर्सिटी ने जानबूझकर चीन के रोबोट और ड्रोन को अपना अविष्कार बताया. इनकी यूनिवर्सिटी ऐसा ड्रोन या रोबोट नहीं बना सकती. वो क्या बना सकती है, वो हम आपको दिखाते हैं. ये ड्रोन, वो गलगोटिया यूनवर्सिटी का अविष्कार है. थर्मोकोल में टेप लगाकर, उसे वायर से बांधकर ड्रोन की तरह बना दिया है. ये सच्चाई है गलगोटिया यूनवर्सिटी की, जो ठीक से एक डमी भी नहीं बना सकती. हमारे संवाददाता AI समिट में मौजूद हैं, मेड इन चाइना वाला फर्जीवाड़ा करने वाली गलगोटिया यूनिवर्सिटी के थर्मोकोल वाले ड्रोन के अविष्कार पर हमारी ये रिपोर्ट आपको देखनी चाहिए. जो यूनिवर्सिटी कायदे से एक थर्मोकोल का ड्रोन नहीं बना सकती. उसके प्रोफेसर कैमरे के सामने डंके की चोट पर दावा करती हैं कि उनके कैम्पस में ड्रोन बन रहा है. उनके कैम्पस में रोबोट भी बन रहा है और जब इनके झूठे दावों की पोल खुल जाती है तो ये सफाई भी ऐसे देने लगती है जिसे सुनकर नेता भी एक बार सोच में पड़ जाए.

यूनिवर्सिटी के झूठ की पोल
यूनिवर्सिटी की सच्चाई जब सामने आई तो AI समिट से उसे हटने के लिए कहा गया. पहले लाइट काटी गई और कहा गया कि चले जाएं. लेकिन जाने के लिए तैयार ही नहीं हुए. नहीं हटे तो सुरक्षाकर्मियों को बुलाकर जबरदस्ती AI समिट से गलगोटिया यूनवर्सिटी के स्टॉल को हटाना पड़ा. ये कितने ढीठ हैं, जिन्होंने देश को बदनाम करने में रत्तीभर भी कमी नहीं छोड़ी. जिन्होंने AI समिट को डिरेल करने में कोई कसर नहीं छोड़ी और जब वैश्विक मंच पर चोरी पकड़ी गई तो बेशर्मी पर अड़े रहे. इनकी आंखों का पानी किस तरह सूख चुका है, उसे ऐसे समझिए कि यूनिवर्सिटी ने एक बयान जारी किया, जिसमें माफी मांगी लेकिन उस माफी में भी घालमेल कर दिया. यूनिवर्सिटी का कहना है कि जो मैडम दावा कर रही थी कि ड्रोन और रोबोट उनके कैम्पस में बना है वो अति उत्साह में बोल गईं. नेहा सिंह कम्युनिकेशन की प्रोफेसर हैं, यूनिवर्सिटी प्रबंधन का दावा है कि वो अति उत्साह में चाइनीज रोबोट और ड्रोन को गलगोटिया का अविष्कार बता गईं. एक संवाद की प्रोफेसर से अगर संवाद करने में गलती हुई तो ये और बड़ा अपराध है. इस अपराध के लिए उनपर एक्शन होना चाहिए. लेकिन उस एक्शन पर यूनिवर्सिटी ने कुछ नहीं कहा है.

गलगोटिया के पुराने पाप
AI समिट से इस यूनिवर्सिटी का स्टॉल हटा दिया गया है लेकिन सवाल है कि क्या इतना काफी है? हो सकता है कि आगे यूनिवर्सिटी प्रशासन चाइनीज ड्रोन और रोबोट को ‘मेड इन गलगोटिया’ बताने वाली प्रोफेसर पर एक्शन भी ले. लेकिन क्या इससे देश की साख पर जो बट्टा लगा है, उसकी भरपाई होगी? क्या दुनिया के सामने फर्जीवाड़ा करने वाली यूनिवर्सिटी पर ऐसी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए, जो नकलची और तकनीक चोरों के लिए उदाहरण बने, क्योंकि ये कोई पहला मामला नहीं है, जब गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने फर्जीवाड़ा किया हो. 2011 में ये यूनिवर्सिटी बनी थी और 2010 ही इसके फर्जीवाड़े शुरू हो गए थे. हम आपको गलगोटिया यूनवर्सिटी के कुछ पुराने पाप बताते हैं. 2010-12 में गलगोटिया यूनिवर्सिटी के संस्थापक सुनील गलगोटिया ने 120 करोड़ रूपये लोन लिए थे. ये लोन उन्होने फर्जी दस्तावेज दिखाकर लिए थे. 2011 में जब गलगोटिया यूनिवर्सिटी शूरू हुई तब हॉस्टल की झूठी गारंटी दी. एडमिशन कराने के बाद जब छात्र रहने के लिए हॉस्टल आए तो उन्हें रहने के लिए कैंपस से 14 किलोमीटर दूर भेज दिया. जालसाजी, धोखाधड़ी, धन का दुरुपयोग और छात्रों से वसूली के मामले में सुनील गलगोटिया, उनकी मां, उनकी पत्नी और उनके बेटे के खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी हुए थे. सुनील गलगोटिया के बेटे ध्रुव गलगोटिया जो इस वक्त गलगोटिया यूनिवर्सिटी के सीईओ वो 14 दिनों तक जेल में बिता चुके हैं. 2020 में कोविड के दौरान छात्रों से पूरी फीस वसूली, यहां तक कि अतिरिक्त पैसों भी लिए.

धोखाधड़ी का पुराना इतिहास
2024 में छात्रों को राजनीति का मोहरा बनाया. छात्रों को सियासी प्रदर्शन में उतार दिए थे. 2024 में ही अपने एक छात्र को डेढ़ करोड़ का प्लेसमेंट दिलावाने का झूठा दावा भी किया था. ये यूनिवर्सिटी के 15 साल का संस्थागत धोखे का पैटर्न है. अब तक छात्रों से, अभिभावको से, लोने देने वालों से झूठ बोलती रही. वही यूनिवर्सिटी वैश्विक मंच पर भी झूठ बोलते पकड़ी गई है. ना सिर्फ पकड़ी गई बल्कि खुद को पीड़ित बताने की बेशर्म कोशिश भी कर रही है. इतना बड़ा धोखा करने के बावजूद कोई डर नहीं है. कोई पश्चाताप नहीं है. ये आश्वस्त हैं कि इन्हें कुछ नहीं होगा. और आश्वासन की ये ऑक्सीजन कहां से आती है? वो भी सुनिए। ये जानते हैं कि फीस के नाम पर धोखा किया, कुछ नहीं हुआ. ये जानते हैं कि पढ़ाई के नाम पर धोखा करते हैं, कुछ नहीं होता. ये जानते हैं कि प्लेसमेंट के नाम पर झूठ बोला कुछ नहीं हुआ. जिस तरह ये नए बच्चों के अभिभावकों के साथ सफाई से झूठ बोलते हैं. उसी तरह AI समिट में पाप करने के बाद भी देश से झूठ बोल रहे हैं. लेकिन मित्रो दुर्भाग्य ये है कि इस अनैतिकता और बौद्धिक बेइमानी को भी कुछ लोग सियासी हथियार बना रहे हैं.

फर्जीवाड़ा और सियासी वार
गलगोटिया यूनिवर्सिटी के फर्जीवाड़े को आधार बनाकर राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि भारत की प्रतिभा और डेटा का उपयोग करने के बजाय, एआई शिखर सम्मेलन अव्यवस्थित तरीके से पीआर का तमाशा बन गया है. भारतीय डेटा बिक्री के लिए उपलब्ध है और चीनी उत्पादों का प्रदर्शन किया जा रहा है. इसके बाद कांग्रेस ने भी पोस्ट किया कि मोदी सरकार ने देश की छवि को अपूरणीय क्षति पहुंचाई है, उन्होंने एआई को मजाक बनाकर रख दिया है. कांग्रेस देश की सबसे पुरानी पार्टी है. राहुल गांधी देश के बहुत बड़े नेता हैं. इस वक्त संसद में नेता प्रतिपक्ष भी हैं. उन्हें जानना चाहिए कि AI समिट किसी एक यूनिवर्सिटी या फिर एक शख्स की नहीं है. ये बीजेपी या फिर सरकार की भी समिट नहीं है. ये पूरे देश का इवेंट है. ये देश की AI शक्ति दिखाने वाली समिट है. इससे देश का गौरव बढ़ेगा. वैश्विक स्तर पर भारतीयों की प्रतिष्ठा बढ़ेगी. सिर्फ एक स्टॉल पर चोरी की तकनीक की प्रदर्शनी से पूरे इवेंट पर सवाल उठा देना बिल्कुल ठीक नहीं है. राहुल गांधी या कांग्रेस को इससे बचाना चाहिए था. इसमें दो राय नहीं कि गलगोटिया यूनिवर्सिटी पर एक्शन होना चाहिए. सरकार ने कहा भी है कि ऐसे फर्जीवाडों को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है. लेकिन किसी एक की गलती के कारण पूरे इवेंट पर सवाल उठाकर सियासत करने से बचना चाहिए.