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Gold Silver Latest Price News in Hindi: सुनामी नहीं, ‘सोना’मी से डर लगता है. सोना-मी. यानी सोने वाली तबाही..चांदी वाली तबाही..ऐसी तबाही..जो किसी भी युद्ध से खतरनाक है. ऐसी तबाही, जो किसी भी आपदा से भयावह है. ऐसी तबाही, जो हर घर-हर परिवार से जुड़ी है. जो सोना-चांदी पिछले एक साल से रॉकेट की रफ़्तार से भाग रही थी. वो सिर्फ 24 घंटे में धड़ाम हो गई है. 24 घंटे के भीतर सोने-चांदी की चमक ऐसे छिन गई कि लाखों लोगों की कमर टूट गई. लाखों-करोड़ों घरों में अचानक कंगाली आ गई. इतना बड़ा नुक़सान हुआ है, जिसकी भरपाई मुश्किल है.इसलिए हम कह रहे हैं, इस समय आपके लिए देश के लिए पूरी दुनिया के लिए सुनामी से बड़ा खतरा ‘सोना-मी’ बन गई है. 

एक दिन में धड़ाम हो गए चांदी के दाम

चांदी की क़ीमत में सबसे बड़ी गिरावट आई है. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर चांदी का भाव सिर्फ 1 दिन में 1 लाख 10 हज़ार रुपये गिर गया. समझ रहे हैं आप. सिर्फ एक दिन में चांदी के दाम 1 लाख रुपये गिर गए. इसका मतलब ये हुआ कि चांदी की कीमत में 2 घंटे में 27% की गिरावट आई है. 1 दिन पहले जिस चांदी का भाव 4 लाख 1 हज़ार रुपये प्रति किलो पहुंच गया था, वो अगले ही दिन 2 लाख 91 हज़ार रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई.

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वहीं MCX पर सोने के भाव में भी 20 हज़ार रुपये यानी 12% की गिरावट आई. 1 दिन पहले सोने का भाव 1 लाख 69 हज़ार रुपये प्रति 10 ग्राम था जो गिरकर 1 लाख 49 हज़ार रुपये पर पहुंच गया. 

सोना और चांदी अपने सर्वकालिक उच्चतम स्तर पर शान से खड़ी थी लेकिन बाज़ार में ऐसा भूकंप आया कि दोनों क़ीमती धातु ताश के पत्तों की तरह ढह गए. ये गिरावट सिर्फ़ भारत में नहीं है. अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में तो भारत से भी बड़ा भूकंप आया है. अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में चांदी की कीमत में 34% तक की गिरावट आई है. वहीं सोने के दाम में 12% की गिरावट आई है.

45 साल में हुई सबसे बड़ी गिरावट

सोने-चांदी के दाम में ऐसी गिरावट 1980 के बाद नहीं देखी गई थी. यानी 45 साल की ये सबसे बड़ी गिरावट है. आख़िर सोने-चांदी के दाम कहां जाकर रुकेंगे? क्या शेयर बाज़ार की तरह सोने-चांदी का बुलबुला भी फूट गया है? एक आम आदमी को मौजूदा स्थिति में क्या करना चाहिए? क्या सोने-चांदी में निवेश के नाम पर कोई बड़ा खेल चल रहा है? इन सवालों को डिकोड करने से पहले आपको ये भी जानना चाहिए कि सोने-चांदी के दाम में गिरावट से दुनिया की अर्थव्यवस्था को कितना नुक़सान हुआ है.

सोने-चांदी के बाज़ार में आए इस भूकंप से 6 ट्रिलियन डॉलर तक के मार्केट कैपिटलाइज़ेशन का नुक़सान होने का अनुमान है. यानी क़ीमत में कमी से एक दिन में 6 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान हो गया. यानी 550 लाख करोड़ रुपये का. इस तरह एक घंटे में लगभग 23 लाख करोड़ रुपये का नुक़सान हुआ.

कितना बड़ा नुक़सान है ये. भारत का लक्ष्य 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनने का है. मतलब भारत जितनी बड़ी अर्थव्यवस्था बनना चाहता है, उससे ज्यादा कल सोने में डूब गया. अमेरिका और चीन को छोड़कर दुनिया के किसी भी देश की अर्थव्यवस्था 6 ट्रिलियन डॉलर की नहीं है. लेकिन सोने और चांदी के दाम में ऐसी गिरावट आई कि एक ही दिन में इतना बड़ा नुकसान हो गया.

रूस-यूक्रेन युद्ध पिछले 4 साल से चल रहा है, लेकिन वहां कुल आर्थिक नुक़सान 2 ट्रिलियन डॉलर का ही हुआ है. यानी इस युद्ध का तीन गुना नुक़सान केवल एक दिन में हो गया. कोरोना संकट के दौरान वैश्विक आर्थिक नुकसान 10-20 ट्रिलियन डॉलर का था. इसका औसत मानें तो 2 साल के दौरान 15 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान हुआ लेकिन यहां एक दिन में ही 6 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान हो गया.

2008-09 के वित्तीय संकट में 10 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान हुआ लेकिन यहां 1 दिन में 6 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान हो गया. यही वजह है कि हम इसे भूकंप कह रहे हैं. 

गोल्ड और सिल्वर एक्सचेंज ट्रेडेड फंड पर भी पड़ा असर

सोने की क़ीमत में गिरावट का असर गोल्ड और सिल्वर एक्सचेंज ट्रेडेड फंड यानी ETF पर भी पड़ा है. लोग सुरक्षित निवेश के लिए ETF में पैसा लगाते हैं. लेकिन कीमत में गिरावट का असर ETF पर भी पड़ा. एक दिन में गोल्ड और सिल्वर ETF में 24% तक की गिरावट आई.

निवेशकों ने सोने और चांदी के दाम में बढ़त को देखते हुए ETF में पैसा लगाया. गिरावट से पहले इनकी वैल्यू लगभग 3 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई थी. ये आम तौर पर सुरक्षित निवेश माना जाता है क्योंकि विशेषज्ञ आपके पैसे का निवेश करते हैं. लेकिन गिरावट की आंधी ऐसी आई कि यहां भी 20 से 30 हज़ार करोड़ रुपये का नुकसान होने की आशंका है.

अब आपको वो कारण भी जानना चाहिए जिसकी वजह से सोने-चांदी के दाम में ये ऐतिहासिक गिरावट आई है. इस क्रैश का सबसे बड़ा कारण बताया जा रहा है अमेरिका के सेंट्रल बैंक यानी फेडरल रिज़र्व में नई नियुक्ति को. अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने फेडरल रिज़र्व के चेयरमैन के लिए केविन वार्श के नाम की घोषणा की है. केविन वॉर्श के नाम का एलान होने के बाद डॉलर में तेज़ी आई जबकि सोने-चांदी के दाम में गिरावट. इसका असर पूरी दुनिया में देखने को मिला.

एक साल पहले 92 हजार रुपये किलो थे चांदी के दाम

लेकिन सोने-चांदी के दाम में गिरावट के पीछे किसी खेल से भी इनकार नहीं किया जा सकता. जिस समय एक आम निवेशक, एक आम ख़रीदार सोने-चांदी में पैसे लगा रहा है. उसी समय बहुत से लोग सोना-चांदी बेचकर अपना पैसा भी निकाल रहे हैं. पहले आपको सोने-चांदी में आई बढ़ोतरी के बारे में जानना चाहिए.  

1 साल पहले यानी 30 जनवरी को 10 ग्राम सोने का दाम 81,200 रुपये था. कल यानी ठीक एक साल बाद और क्रैश से ठीक पहले 10 ग्राम सोने का दाम 1,65,500 रुपये पर पहुंच गया. यानी सोने के दाम में 104% की बढ़ोतरी हुई.

वहीं 1 साल पहले 1 किलो चांदी का दाम 92,200 रुपये था और कल क्रैश से ठीक पहले सर्राफा बाज़ार में चांदी का भाव 3 लाख 45 रुपये पर पहुंच गया था. यानी इसमें 274% की बढ़ोतरी हुई थी.

अगर कोई मुनाफ़ा वसूली करके सोने-चांदी के निवेश से बाहर निकल गया होगा तो उसको कितना फायदा हुआ होगा ये आप समझ सकते हैं. उसने सिर्फ़ 1 साल में सोने पर 104% का मुनाफ़ा और चांदी पर 274% का मुनाफा कमाया होगा. 

ज्वैलरी बिक्री में 24 प्रतिशत की कमी

सोचिए, ये कितना बड़ा फायदा है. सेंसेक्स में जहां केवल 7% यानी सिंगल डिजिट की बढ़ोतरी हुई, वहीं सोने-चांदी में डबल डिजिट में नहीं बल्कि ट्रिपल डिजिट में बढ़ोतरी हुई. इस समय अगर कोई सोने-चांदी को बेचकर बाहर निकल गया होगा तो वो मालामाल हो गया होगा. 

आम आदमी जहां 10 या 20% के मुनाफ़े से संतुष्ट हो जाता है, वहीं जिन लोगों ने सोने-चांदी में प्रॉफिट बुकिंग की है उन्हें 104% से लेकर 274% तक का लाभ हो रहा है. 

भारत में लोग सोना-चांदी सहेज कर रखते हैं. एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक. वहां मुनाफ़ा कमाने वाले दाम को घटा-बढ़ा रहे हैं. यहां आपको ये भी जानना चाहिए कि सोने-चांदी की फ़िजिकल बिक्री उतनी नहीं हो रही है, जितना दाम बढ़ रहा है. ज्वैलरी की बिक्री में 24% की भारी गिरावट आई है. आभूषण बेचने वाले दुकानदार भी इसकी गवाही देते हैं.

यानी सोना-चांदी जिस चीज़ के लिए सबसे ज़्यादा इस्तेमाल की जाती है. वहां तो महंगाई की वजह से डिमांड कम हो गई है लेकिन इसके बावजूद दाम में ज़बरदस्त उछाल आया है. अर्थशास्त्र का सामान्य सिद्धांत है कि मांग घटने पर दाम गिरते हैं और मांग बढ़ने पर दाम बढ़ते हैं. लेकिन सोने-चांदी की क़ीमत ने इस सिद्धांत को भी चुनौती दे दी. फिर कीमत बढ़ने की वजह क्या है?

पिछले एक साल में क्यों बढ़े गहनों के दाम?

पिछले एक साल से सोने और चांदी को आभूषणों से नहीं बल्कि निवेश से जोड़ दिया गया है. गोल्ड ETF और सिल्वर ETF के अलावा डिजिटल गोल्ड और डिजिटल सिल्वर जैसे निवेश के तरीक़े आ गए हैं. लोग मोबाइल फ़ोन से सोना और चांदी ख़रीद रहे हैं. एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को सोने और चांदी से मुनाफे की कहानी सुना रहा है. जबकि वो मुनाफा वास्तविक नहीं होता है. लेकिन इसके बावजूद लोग सोचते हैं कि पड़ोसी ने सोने-चांदी में निवेश करके इतना पैसा कमा लिया तो मैं क्यों पीछे छूट जाऊं.

इसी मुनाफ़े की उम्मीद में हर कोई सोना-चांदी ख़रीद रहा है, सोने में निवेश कर रहा है. इसी का नतीजा है कि सोने-चांदी की क़ीमत में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई. लेकिन जब असली मुनाफा कमाने की बारी आई तो सामान्य निवेशक पीछे छूट गया और कुछ लोगों ने पैसा कमाकर अपनी तिजोरी भर ली. सोचिए, सामान्य निवेशक उम्मीद लगाते ही रह गए और कुछ लोगों ने सोने-चांदी से भारी फायदा उठाया.  

हमारे देश में शादियों का सीज़न सिर्फ 4 दिन बाद शुरू होने वाला है. देश के अलग-अलग राज्यों में लाखों शादियां होंगी. इनमें से जिन परिवारों में शादियां अगले कुछ दिनों या हफ़्तों में होने वाली हैं, उनके यहां शादियों के लिए ज्वैलरी की ख़रीदारी भी हो गई होगी. लेकिन जिस तरह सोने और चांदी का दाम क्रैश हुआ है, उससे ये परिवार परेशान होंगे. वो सोच रहे होंगे कि उन्होंने कुछ दिन और इंतज़ार किया होता तो शायद उनके पैसे बच जाते.

लाखों भारतीय परिवारों को हुआ भारी नुकसान

मान लीजिए एक परिवार ने 100 ग्राम सोने की ज्वैलरी 2 दिन पहले बनाई हो. इस सोने पर उस वक़्त 17 लाख 53 हज़ार 400 रुपये खर्च हुए होंगे लेकिन दाम घटने के बाद उसी सोने का दाम 16 लाख 57 हज़ार 950 रुपये हो गए हैं. यानी एक परिवार को 95,450 रुपये का नुक़सान. सोचिए, शादी वाले एक परिवार को लगभग एक लाख रुपये का नुक़सान हो गया और ऐसे एक नहीं लाखों परिवार होंगे.

अगर मुनाफ़ा कमाने का ये खेल आगे भी जारी रहा तो वास्तविक सोना ख़रीदने वाले परिवारों का नुक़सान भी उसी अनुपात में बढ़ेगा. सोचिए, शादी के घर में 1 लाख रुपये से कितनी मदद मिलती. लेकिन क़ीमत के इस खेल ने आम लोगों की मुश्किल बढ़ा दी है.

इन सबके बीच आज सोने और चांदी को लेकर एक और ख़बर आई है. कल देश का बजट पेश होने वाला है. बजट में सरकार सोने और चांदी को लेकर भी बड़ा एलान कर सकती है.

क्या सोना-चांदी खरीद का ये सही समय है?

सूत्रों के मुताबिक़ सरकार सोने और चांदी पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी में कमी कर सकती है. इसे 6% से घटाकर 4% किया जा सकता है. अगर ऐसा होता है तो सोने और चांदी के दाम में और कमी आएगी. सोना प्रति 10 ग्राम करीब 3 हजार और चांदी प्रति किलो 6 हजार रुपए सस्ती हो सकती है.

यानी मौजूदा समय सोने-चांदी के दाम में उतार-चढ़ाव का है. यानी कुछ दिनों तक ऐसी स्थिति बनी रह सकती है. लोग असमंजस में हैं कि ये ख़रीदारी का मौक़ा है या मंदी की शुरुआत. ऐसे में अगर घर में शादी-ब्याह न हो तो आपको हमारी सलाह है. अभी जल्दबाज़ी में ख़रीदारी से बचना चाहिए. शायद मुनाफा कमाने वालों के बाजार से बाहर निकलने के बाद कीमतों में करेक्शन आ जाए.