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US India Trade deal: अमेरिकी टैरिफ से राहत मिलते ही भारत और अमेरिका के संबंधों की अनिश्चितता दूर हो गई है. भारत-अमेरिका के बीच डील होने से भारतीय अर्थव्यवस्था को बूस्ट मिलने की बात कही जा रही है. हालांकि डील का राजनीतिक विरोध भी हुआ, जिसकी वजह से पाकिस्तान में सन्नाटा है. ट्रंप ने पीएम मोदी से बातचीत के बाद कहा कि भारत के खिलाफ रेसीप्रोकल टैरिफ 25% से घटाकर 18% कर दिया जाएगा. बाद में US दूतावास की तरफ से सफाई भी आई कि रूसी तेल खरीदने को लेकर जो 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाया गया था, उसे भी हटा लिया गया है. यानी अमेरिका अब भारत पर 50% की जगह मात्र 18% टैरिफ लगाएगा.

अमेरिका ने करीब 6 महीने पहले भारत पर सबसे ज्यादा 50% टैरिफ लगाया था. केवल दो देशों पर इतना ज्यादा टैरिफ लगाया था- भारत और ब्राजील. टैरिफ में कटौती के बाद भारत पर अमेरिकी टैरिफ भारत के पड़ोसी देशों खासकर पाकिस्तान की तुलना में कम हो गया है.

भारत और अमेरिका के बीच पिछले कई महीनों से ट्रेड डील पर बातचीत चल रही थी. सहमति नहीं बन पा रही थी. ऐसे में अचानक ट्रंप के एलान ने सबको चौंका दिया. कूटनीति के जानकार ट्रंप के इस फैसले को यूरोपियन यूनियन के साथ भारत की ट्रेड डील से जोड़ रहे हैं. 27 जनवरी को भारत ने EU के साथ समझौते का एलान किया. उसके 5 दिन के बाद ही ट्रंप ने भारत के साथ ट्रेड डील की घोषणा की. यानी कहीं-न-कहीं EU के साथ भारत की डील का असर ट्रंप के फैसले पर जरूर रहा होगा. इस डील से ट्रंप के पास ये संदेश ज़रूर गया होगा कि भारत ने वैकल्पिक रास्ता तैयार कर लिया है.

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टैरिफ कम होने से भारतीय अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा. भारत के उद्योगों को क्या लाभ होगा. इन सवालों का जवाब तलाशने से पहले जानते हैं कि अमेरिका से लेकर भारत तक इस घोषणा का तुरंत क्या असर हुआ है. इसकी शुरुआत अमेरिकी बाजार से करते हैं.

टैरिफ घटने का ऐलान होते ही अमेरिका के डाउ जोंस में 1% की तेजी आई वो 515 प्वाइंट ऊपर बंद हुआ. S&P, NASDAC में भी उत्साह दिखा.

अमेरिकी बाजारों में लिस्टेड भारतीय कंपनियों के शेयर चढ़े. खासकर IT और फार्मा कंपनियों के शेयरों में बढ़त दिखी, क्योंकि टैरिफ का बुरा असर इन्हीं पर पड़ा था.

ट्रेड डील का भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ा है. अमेरिकी टैरिफ कम करने का एलान होने के साथ ही भारतीय शेयर बाजार तेजी से भागे. मंगलवार को सेंसेक्स 2073 प्वाइंट चढ़कर बंद हुआ. निफ्टी में 639 प्वाइंट की बढ़त दिखी गई. भारतीय बाजार में एक दिन में करीब 2.5 फीसदी की तेजी आई. शेयर बाजार के निवेशकों के लिए ये बड़ी राहत थी. रियल्टी, मेटल, बैंकिंग, फार्मा और ऑटो सेक्टर में सबसे ज्यादा खरीदारी देखी गई. शेयर बाजार में तेजी से निवेशकों का पैसा करीब 12 लाख करोड़ बढ़ गया. कैसे, एक डील का एलान होते ही शेयर बाजार ने निवेशकों को मालामाल कर दिया. टैरिफ और भारत-अमेरिका के बीच संबंधों में तनाव के कारण विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से दूरी बना रखी थी.

जुलाई 2025 से जनवरी 2026 तक विदेशी निवेशकों ने 2 लाख 20 हज़ार करोड़ से ज्यादा की बिकवाली की है. यानी टैरिफ का एलान होने से अब तक विदेशी निवेशकों ने हर घंटे औसतन 152 करोड़ रुपये के शेयर बेचे. लगातार विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर शेयर बाजार की उथल-पुथल पर पड़ा था. बाजार के जानकारों के मुताबिक भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर बात बनने से शेयर बाजार को मजबूती मिलेगी.

एक तरफ शेयर बाजार जहां तूफानी तेजी से भागा, वहीं दूसरी तरफ़ रुपये में भी मजबूती आई. रुपया मंगलवार को डॉलर की तुलना में लगभग 1.5 प्रतिशत मजबूत हुआ. एक डॉलर का भाव 92 रुपये तक पहुंच गया था जो आज 90 रुपये 26 पैसे पर बंद हुआ. दिसंबर 2018 के बाद एक दिन में ये रुपये की सबसे ज्यादा मजबूती है. यानी रुपये की मजबूती के मामले में 7 साल का रिकॉर्ड आज टूट गया.