
Bengal Ghost Lights: पश्चिम बंगाल के संदेशखाली और सुंदरबन के दलदली इलाकों में रात के समय दिखने वाली अजीब रोशनियों को लोग रहस्यमयी रोशनी समझते हैं. बता दें इसे‘अलेया’ कहते हैं. ये रोशनियां सदियों से मछुआरों और स्थानीय लोगों के लिए डर और हैरानी का कारण रही हैं. बता दें, लोककथाएं इन्हें आत्माओं से जोड़ती हैं, वहीं विज्ञान इसके पीछे एक प्राकृतिक वजह बताता है. आइए आपको इस रहस्य के बारे में विस्तार से बताते हैं.
क्या है अलेया रोशनी?
अलेया ऐसी रहस्यमयी रोशनी होती है जो दलदल या पानी के आसपास अचानक दिखाई देती है. कुछ देर बाद गायब हो जाती है. यह रोशनी न तो किसी दीपक जैसी होती है. न ही आग की तरह तेज होती है, बल्कि यह हल्की नीली या हरी चमक के रूप में नजर आती है.
स्थानीय मान्यताओं में अलेया का डर
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार अलेया उन मछुआरों की आत्माएं हैं, जिनकी मौत दलदल में डूबने से हो गई थी. लोगों का मानना है कि ये आत्माएं रात में रोशनी बनकर घूमती हैं. बता दें, कुछ कहानियों में कहा जाता है कि अलेया मछुआरों को आने वाले खतरे का संकेत देती है, जिससे वे बच सकें.
वहीं दूसरी मान्यता यह भी है कि कभी-कभी यही रोशनी लोगों को गलत रास्ते पर ले जाती है. जिसके बाद गलत रास्ते पर जाने वाले लोग दलदल में फंसकर अपनी जान गंवा देते हैं.
क्या कहता है विज्ञान?
विज्ञान इन रोशनियों को किसी भूत या आत्मा से नहीं जोड़ता है. विज्ञान इसे एक नेचुरल प्रोसेस से जोड़कर देखता है. दुनिया के कई हिस्सों में इस तरह की रोशनी को ‘विल-ओ-द-विस्प’ या ‘इग्निस फैचुअस’ कहा जाता है.
दलदल से निकलने वाली गैसें
वैज्ञानिकों का कहना है कि दलदली इलाकों में पेड़-पौधे और दूसरे जैविक पदार्थ सड़ते रहते हैं. इस सड़न से मीथेन और फॉस्फीन जैसी गैसें बनती हैं. जिन्हें आम भाषा में मार्श गैस कहा जाता है. ये गैसें धीरे-धीरे पानी की सतह के ऊपर आने लगती हैं.
बता दें, जब ये गैसें हवा के संपर्क में आती हैं तो फॉस्फीन की वजह से ये अपने आप जल सकती हैं. इसके लिए किसी माचिस या चिंगारी की जरूरत नहीं होती है. इसी प्रक्रिया से नीली या हरी रोशनी दिखाई देती है जिसे लोग भूतिया रोशनी समझ लेते हैं.
माइक्रो-लाइटनिंग की भूमिका
कुछ नई रिसर्च बताती हैं कि गैस के बुलबुले जब ऊपर उठते हैं तो उनके बीच हल्का घर्षण होता है. इससे बहुत मामूली बिजली बनती है, जिसे माइक्रो-लाइटनिंग भी कहा जाता है. यही छोटी सी बिजली गैसों को जला देती है और रोशनी नजर आने लगती है.
बता दें, अलेया जैसी रोशनियां केवल संदेशखाली या सुंदरबन तक नहीं हैं. गुजरात के रण ऑफ कछ में भी इसी तरह की रोशनी देखी जाती है. इसे वहां पर ‘चिर बत्ती’ कहा जाता है. इससे साफ है कि यह कोई स्थानीय भूतिया घटना नहीं है बल्कि एक नेचुरल प्रोसेस है.
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