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DNA: कांग्रेस के लिए हाफिज ‘साहब’और RSS ‘अलकायदा’ सोचिए ये कितनी बड़ी ट्रेजिडी है जिनका सम्मान होना चाहिए वो सेना के जवान आतंकी घोषित कर दिए जाते हैं और जिन्हें सलाखों के पीछे होना चाहिए उनका मंच पर सम्मान होता है. मित्रो ये पाकिस्तान में ही हो सकता है. अफसोस हमारे देश में भी ऐसी सोच रखनेवाले कुछ लोग मौजूद हैं. ये आतंकियों का सीधा समर्थन नहीं करते, लेकिन राष्ट्रवादी संगठनों की तुलना आतंकी संगठनों से करने का पाप करते हैं. अब हम इसी संकीर्ण सोच का विश्लेषण करेंगे

कांग्रेस के एक सांसद हैं मणिकम टैगोर. लोकसभा में कांग्रेस के व्हिप भी हैं. राहुल गांधी के करीबी हैं. तो उन्होंने अपनी सोच को पूरी तरह राहुल गांधी की पसंद के मुताबिक ढाल लिया है. जैसे राहुल गांधी आरएसएस के खिलाफ बयानबाजी करते हैं. वैसे ही मणिकम टैगोर भी आरएसएस के खिलाफ बयानबाजी करते रहते हैं. पहले सुनिए अब मणिकम टैगोर ने क्या कहा है? आरएसएस की तुलना अल कायदा से. DNA मित्रो ये बौद्धिक दिवालियापन की पराकाष्ठा है. ये तार्किक दरिद्रता का शिखर है. सोचिए जो संगठन 100 साल से देशहित के कार्य में जुटा है. जिस संगठन का उद्देशय ही मानव कल्याण है उसकी तुलना किसी आतंकी संगठन से करना बौद्धिक पाप है.

आरएसएस से अल-कायदा की तुलना क्यों?
मतलब जिस अल कायदा का इतिहास खून से रंगा है. लादेन के जिस संगठन ने दुनिया के हर कोने में निर्दोष लोगों का रक्त बहाया ऐसे संगठन से आरएसएस की तुलना. ऐसी तुलना अपने तर्क को तिलांजलि दे चुका कोई व्यक्ति ही कर चुका है. राहुल गांधी की नज़र में अपनी इमेज चमकाने के लिए मणिकम टैगोर ऐसा कर रहे हैं. औऱ जानते हैं मणिकम टैगोर ऐसा क्यों कर रहे हैं अब ये समझते हैं. प्रसिद्ध चीनी विचारक कन्फ्यूशियस ने कहा है कि तीन तरीकों से हम ज्ञान प्राप्त करते हैं. पहला चिंतन से, जो सबसे श्रेष्ठ है, दूसरा अनुकरण से, जो सबसे आसान है, और तीसरा अनुभव से, जो सबसे कड़वा है. तो कांग्रेस को भी ज्ञान प्राप्त करने यानी सीखने की सलाह पार्टी के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने दी थी. दिग्विजय सिंह ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में आरएसएस की संगठन शक्ति की प्रशंसा करते हुए कांग्रेस को आरएसएस से सीखने की सलाह दी थी. 

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दिग्विजय की सलाह, RSS से सीखे कांग्रेस 
सुना आपने. चुनाव में हार का शतक बना चुकी कांग्रेस को दिग्विजय सिंह ने आरएसएस से संगठन को मजबूत करने की क्षमता सीखने की बात कही थी. DNA मित्रो विद्वान कहते हैं बुद्धिमान व्यक्ति दूसरो की शक्ति और कमजोरी से सिखता है. दिग्विजय सिंह ने भी अपनी पार्टी को बुद्धिमता अपनाते हुए RSS से संगठन शक्ति सीखने की अपील की थी. लेकिन जैसा की प्रसिद्ध विद्वान बेंजामिन फ्रैंकलिन ने कहा है कि अनुभव एक महंगा स्कूल है, लेकिन मूर्ख इसी में सीखते हैं.

कांग्रेस नेता अपनी गलतियों से सीख रहें
कांग्रेस के नेताओं ने अपनी गलतियों से सीखने का हठ पाल लिया है. इन्होंने विचारधारा के नाम पर अपने आसपास बड़ी दीवार बना ली है. वो विचारधारा के विरोध की बात तो करते हैं, लेकिन विरोध के लिए मजबूत संगठन बनाने की बात नहीं करते हैं. मणिकम टैगोर और सलमान खुर्शिद जैसे नेताओं ने विचारधारा के नाम पर अपनी तर्क शक्ति को ज़ंजीर से जकड़ दिया है. इसलिए उन्हें आरएसएस की संगठन शक्ति नहीं दिखती. ऐसी छोटे दायरे में कैद सोच वाले नेताओं को आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार ने आईना दिखाया है

RSS से नहीं सीखेंगे कम्युनिस्ट पार्टियां कमजोर हुई  
सामान्य तौर पर ये कहा जाता है कि जिससे शत्रुतता हो उसमें भी अगर कुछ अच्छा है तो सीखना चाहिए. अनुशासन और मजबूत संगठन शक्ति के कारण ही आज आरएसएस राष्ट्रहित के काम में सबसे आगे रहता है. मित्रो अपनी संगठन शक्ति के कारण ही कभी देशभर में वामपंथी दल बहुत मजबूत हुआ करते थे. जैसे ही संगठन कमजोर हुआ लेफ्ट का आधार भी सिमट गया. अब ये कांग्रेस को तय करना है कि वो किस दिशा में आगे बढ़ना चाहती है.

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