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Delhi Riots: दिल्ली से तेहरान और मॉस्को से वॉशिंगटन डीसी यानी देश और दुनिया के लिए खतरनाक समय चल रहा है. अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप को भी यही लग रहा है। और दिल्ली की हालत देखकर आपको भी यही लग रहा होगा. ये समय भारत के लिए इसलिए खतरनाक है. क्योंकि यहां दंगा रोकने वालों पर पत्थर बरसाए जा रहे हैं और दंगा कराने वालों पर फूल. देश की राजधानी में पुलिस वालों पर हमले किये जाते हैं और दिल्ली में दंगा आरोपी को मिठाई खिलाई जाती है. माला पहनाई जाती है. इससे खतरनाक समय..दिल्ली के लिए और देश के लिए और क्या हो सकता है. 

दंगा रोकनेवालों पर पथराव   

24 घंटे पहले DNA में हमने दिल्ली के तुर्कमान गेट पर पथराव करनेवालों की वैचारिक मरम्मत की थी. हमने सवाल उठाया था कि क्या तुर्कमान गेट पर हुए पथराव का दिल्ली दंगे के आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम गैंग से वैचारिक कनेक्शन है और आज एक दंगा आरोपी का स्वागत किया गया. जिसका स्वागत हो रहा है, इसका नाम गुलफिशा फातिमा है. फातिमा भी उमर खालिद और शरजील इमाम की तरह ही दिल्ली दंगे की आरोपी है. दिल्ली को हिंसा की आग में झुलसाने की साजिश रचने वाली गुलफिशा फातिमा का स्वागत कल ही किसी नायक की तरह स्वागत हुआ. गुलफिशा का ये शानदार स्वागत दिल्ली की तिहाड़ जेल के बाहर हुआ. जब कोई खिलाड़ी, कोई टीम, मेडल जीतकर देश लौटती है तो गाजे-बाजे और फूल माला के साथ उसका स्वागत एयरपोर्ट पर होता है. ठीक उसी तरह गुलफिशा का स्वागत तिहाड़ जेल के बाहर हुआ. यानी जो लोग तिहाड़ के बाहर गुलफिशा का स्वागत करने पहुंचे थे, उनके लिए वो आदर्श है, हीरो है, विजेता है. और गुलफिशा किनके लिए आदर्श है, विजेता है. 

तिहाड़ जेल के बाहर गुलफिशा का स्वागत 

गुलफिशा के लिए हाथ में गुलाब लिए बुर्का पहने एक महिला और लंबी दाढ़ी वाले एक शख्स खड़े थे. जब गुलफिशा जेल से बाहर आई तो कई मजहबी नारे भी लगे. एक विशेष सोच के लोगों ने गुलफिशा का स्वागत ऐसे किया जैसे उसने UPSC की परीक्षा में टॉप किया हो. जैसे उसने कोई बड़ी अकादमी उपलब्धि हासिल की हो, जैसे उसने देशहित में कोई बड़ा काम किया हो. ये स्वागत समारोह तिहाड़ जेल के बाहर हुआ. अब सवाल ये है कि आखिर गुलफिशा ने ऐसा क्या किया था कि वो तिहाड़ में बंद थी. क्या वो किसी सामाजिक बुराई के खिलाफ लड़ी थी. क्या उसने किसी घोटाले का पर्दाफाश किया था. मित्रो यही सवाल देश की एकता, अखंडता और शांति को चोट पहुंचाने वाली सोच को सच का आईना दिखाते हैं. यही सवाल बताते हैं कि हमारे बीच कैसे देश को चोट पहुंचाने वाली सोच मजबूत हो जाती है. यहीं पर, तुर्कमान गेट के पत्थरबाजों और उनके वैचारिक संरक्षकों की सोच एक हो जाती है. जिस गुलफिशा के स्वागत में तिहाड़ जेल के बाहर भीड़ जुटी थी. वो फरवरी 2020 दिल्ली दंगों की आरोपी है. फरवरी 2020 में देश की राजधानी में 53 लोगों की जान लेनेवाले दंगों की आरोपी है गुलफिशा फातिमा. 

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गुलफिशा के घर पर ताला लगा 

पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक विरोधी प्रदर्शनों की साजिश में गुलफिशा शामिल थी. इन्हीं प्रदर्शनों की आड़ में दंगे की साजिश रची गई. वह दिल्ली दंगों की साजिश से जुड़ी मीटिंग्स में शामिल थी. यानी वो दंगों की मास्टरमाइंड में से एक है. उसने महिलाओं और बच्चों को प्रदर्शन में शामिल करने की साजिश रची और व्हाट्सएप ग्रुप्स बनाकर लोगों को दंगे के लिए उकसाया. उसपर हिंसा के लिए लाल मिर्च पाउडर, एसिड, बोतलें और डंडे जमा करने का आरोप है. गुलफिशा ने 22-23 फरवरी 2020 को जाफराबाद मेट्रो स्टेशन पर चक्का जाम के बहाने भीड़ जुटाई थी. वो हिंसा के लिए फंड जुटाने और ग्राउंड लेवल पर दंगाईयों को लॉजिस्टिक्स सपोर्ट देने में शामिल थी. गुलफिशा मेडल जीतनेवाली देश की बहादुर बेटी नहीं है, वो देश को चोट पहुंचानेवाली, दिल्ली को दंगे की आग में झुलसानेवाली और 53 लोगों की जान लेनेवाली साजिश की आरोपी है. आज हमारी टीम दिल्ली में गुलफिशा के घर पहुंची. सोचा, उसके घरवालों से सवाल पूछें कि क्या उन्होंने अपनी बेटी को ये नहीं बताया कि हिंसा गलत है. दंगों की साजिश करना अपराध है. लेकिन हमें गुलफिशा के घर पर ताला लगा मिला. तिहाड़ के बाहर गुलफिशा का सम्मान करने वाले साफ-साफ मुकर गए. कह रहे हैं हम उसे नहीं जानते. ये उसी मानसिकता के लोग हैं जो पत्थरबाजों को भी मासूम बताते हैं

दंगे की आरोपी पर फूल 

ये वही लोग हैं जो तुर्कमान गेट पर दंगा रोकनेवाली पुलिस पर पथराव करते हैं. और तिहाड़ के बाहर दंगे की आरोपी पर फूलों की बारिश करते हैं. ये शारीरिक तौर पर अलग-अलग है. लेकिन वैचारिक तौर पर ये पूरी तरह एक हैं. कट्टरपंथी सोच इन्हें एकजुट करती है. भारत विरोधी सोच वाली कट्टरपंथी वैचारिक एकता इन्हें मजबूती से जोड़ती है. गुलफिशा के साथ कल दिल्ली दंगे के आरोपी शिफा उर रहमान, मीरान हैदर और मोहम्मद सलीम खान को भी जेल से रिहाई मिली. आपको जानकार हैरानी होगी कि दंगों के आरोपी शिफा से मिलने के लिए उसके घर भीड़ उमड़ रही है. लोग शिफा उर रहमान से ऐसे मिल रहे हैं जैसे वो कोई नायक हो. ये कह रहे हमारी ईद हो गई. मतलब ये इनके लिए खुशी का सबसे बड़ा मौका है. सोचिए कैसे लोग हैं जिनके लिए दंगों के आरोपी की जेल से रिहाई खुशी का मौका है. 53 लोगों की जान लेनेवाले दंगे के आरोपी की रिहाई पर ये ईद मना रहे हैं.इन्होंने कैसे अपनी तर्कशक्ति को तिलांजली दे दी है. इन्हें शिफा निर्दोष दिख रहा है.  ये लोग हमारे ही बीच रहते हैं. कल ये किसी आतंकी को भी निर्दोष बताएंगे. बताएंगे क्या बताते रहे हैं. इसलिए हम बार-बार कह रहे हैं कि ये भारत के लिए बहुत खतरनाक समय है