
DNA: भारत के लिए खतरनाक समय का अलार्म सिर्फ गुलफिशा का स्वागत करनेवाले नहीं बजा रहे हैं. खतरनाक समय का संकेत वो कट्टरपंथी भी दे रहे हैं जिन्होंने धार्मिक विश्वास की आड़ में दिल्ली को अतिक्रमण की राजधानी बना दिया है. ये खतरनाक इसलिए हैं क्योंकि इन्होंने सरकारी जमीन पर अतिक्रमण किया है. दिल्ली को बदसूरत किया है। दिल्ली में अराजकता का माहौल पैदा किया है. दिल्ली के तुर्कमान गेट पर फ़ैज़-ए-इलाही मस्जिद के पास अतिक्रमण हटाने को लेकर हुई हिंसा के बाद अब शांति है. लेकिन जैसे-जैसे इस मामले में छानबीन आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे दंगे के पीछे की साज़िश सामने आती जा रही है. मस्जिद पर बुलडोज़र कार्रवाई की अफ़वाह फैलाने के पीछे का सच सामने आ रहा है.
सवाल ये भी है कि क्या मस्जिद की आड़ में अतिक्रमण और अवैध निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है? इसका कारण ये है कि फैज़-ए-इलाही मस्जिद के बाद दिल्ली की 2 और मस्जिदों पर अतिक्रमण को बढ़ावा देने के आरोप लगे हैं. अतिक्रमण के आरोपों पर जामा मस्जिद और डिफेंस कॉलोनी की बस्ती बावली मस्जिद के इर्द-गिर्द भी बुलडोज़र चलाया जा सकता है. दिल्ली हाईकोर्ट ने जामा मस्जिद और बस्ती बावली मस्जिद के बाहर अतिक्रमण को लेकर क़ानून के तहत कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. मस्जिदों के बाहर कब्ज़े के इस मॉडल का विश्लेषण करने से पहले आपको तुर्कमान गेट पर हुई हिंसा को लेकर आज का अपडेट जानना चाहिए.
अब तक कुल 11 आरोपी गिरफ्तार, कई बड़े खुलासे
कल की हिंसा के सिलसिले में आज 6 और पत्थरबाज़ों को गिरफ़्तार किया गया है. इस तरह पत्थरबाज़ी के सिलसिले में अब तक 11 आरोपियों को गिरफ़्तार किया जा चुका है. इस हिंसा में कुछ सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर के नाम भी सामने आए हैं. इसमें सबसे बड़ा नाम यूट्यूबर सलमान ख़ान का है. सलमान ने सोशल मीडिया के सहारे माहौल बिगाड़ने की साजिश की. उसने पुलिस और प्रशासन के काम में खलल डालने के लिए इलाक़े के लोगों को इकट्ठा किया. आप भी सुनिए, सलमान ने कैसे लोगों को भड़काया.
सलमान की तलाश में जुटी पुलिस
पुलिस अब सलमान की तलाश में जुटी है. सोशल मीडिया पर उन्मादियों के बीच ये अफवाहबाज बेहद लोकप्रिय है. इंस्टाग्राम पर उसके 23 लाख फॉलोअर हैं जबकि फेसबुक पर क़रीब 4 लाख. आप समझ सकते हैं कि उसने अपनी ज़हरीली ज़ुबान और अफ़वाह से कितने लोगों को हिंसा के लिए उकसाया होगा. इसी तरह हिंसा के मामले में पुलिस ने ऐमन रिज़वी नाम की एक महिला को भी पूछताछ के लिए बुलाया है. ऐमन पर भी अतिक्रमण को लेकर पुलिस की कार्रवाई के ख़िलाफ़ भड़काऊ पोस्ट करने का आरोप है. ये महिला एक NGO से जुड़ी है और कट्टरपंथियों से जुड़े हर प्रदर्शन में शामिल होती है. इससे पहले शाहीनबाग़ में CAA के ख़िलाफ़ प्रदर्शन में भी पूरी तरह एक्टिव थी.
सोशल मीडिया पोस्ट के बाद हुआ हंगामा
कुल मिलाकर 10 सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर की लिस्ट पुलिस ने तैयार की है. इन्होंने बुलडोज़र एक्शन को लेकर अफ़वाह फैलाई. उनकी अफवाह के बाद आधी रात में भीड़ तुर्कमान गेट पर इकट्ठा हुई. उन्होंने पुलिस और MCD के कर्मचारियों पर हमला शुरू कर दिया. अब पुलिस चुन-चुनकर इन दंगाइयों को गिरफ़्तार कर रही है. वीडियो में पहचान के बाद उन्हें पकड़ा जा रहा है. लेकिन इनके परिवार वालों को लगता है कि वो तो मासूम हैं, उन्होंने पत्थर चलाया ही नहीं. एक तरफ़ तुर्कमान गेट की हिंसा का सच सामने आ रहा है. दूसरी तरफ़ कुछ लोग अभी भी बेशर्मी से दंगाइयों का बचाव कर रहे हैं. दंगाइयों के इन वैचारिक मित्रों को हाईकोर्ट के आदेश की कोई परवाह नहीं है. अवैध कब्ज़ा उनके लिए चिंता का विषय नहीं है. पुलिस पर हमला उनके लिए कोई मुद्दा नहीं है.
पुलिस ने 100 से ज्यादा धार्मिक नेताओं से की बात
पत्थरबाज़ों के वैचारिक मित्र बार-बार ये दलील दे रहे हैं कि पुलिस को स्थानीय लोगों को भरोसे में लेकर कार्रवाई करनी चाहिए थी. लेकिन उनकी ये दलील खोखली है. दिल्ली पुलिस का साफ़ कहना है कि मस्जिद कमेटी से जुड़े लोगों के अलावा धार्मिक नेताओं से भी बातचीत की गई थी. उन्हें बताया गया कि मस्जिद पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है. लेकिन इसके बावजूद हिंसा हुई. आपको दिल्ली पुलिस की बातें ध्यान से सुननी चाहिए. पुलिस ने 100 से ज़्यादा धार्मिक नेताओं के साथ बैठक की. उन्हें तथ्य बताकर पूरी स्थिति से अवगत कराया गया. लेकिन इसके बावजूद इन धार्मिक नेताओं की बात दब गई. या फिर जान-बूझकर दबाई गई. जबकि हिंसा का समर्थन करने वाले अपनी बात पहुंचाने में कामयाब रहे. कामयाब होते भी कैसे नहीं. उन्हें अपनी अवैध कमाई जो बचानी थी. यहां आपको फैज़-ए-इलाही मस्जिद की इंतज़ामिया कमेटी की तरफ़ से चलाई जा रही व्यावसायिक गतिविधियों के बारे में भी जानना चाहिए. वो व्यावसायिक गतिविधियां जो 36 हज़ार वर्ग फीट सरकारी ज़मीन पर अवैध कब्ज़ा करके चलाई जा रही थीं.
इंतज़ामिया कमेटी सरकारी ज़मीन पर बारात घर चला रही थी जो शादियों और दूसरे आयोजनों में इस्तेमाल होता था.
यहां प्राइवेट डायग्नोस्टिक सेंटर था जहां इलाज के नाम पर लोगों से पैसे लिए जाते थे. यहां अल्ट्रासाउंड कराने का खर्च 600 रुपये था.
इसी तरह सड़क और फुटपाथ पर पार्किंग बनी थी. यहां 3 घंटे गाड़ी खड़ी करने के लिए 100 रुपये लिए जाते थे.
अवैध कब्जे से होती थी साल में करोड़ो रुपये की कमाई
इस अवैध कब्ज़े से साल में करोड़ों रुपये की कमाई होती होगी. अब अवैध कब्ज़ा हटाने से इनकी कमाई बंद होगी तो ये तो भड़केंगे ही. यही वजह है कि मज़हब का सहारा लेकर अफ़वाह फैलाई गई. मस्जिद पर बुलडोज़र कार्रवाई का झूठ फैलाकर लोगों को इकट्ठा किया गया. मस्जिद के बाहर अवैध कब्ज़े से कमाई का ये मॉडल सिर्फ़ फ़ैज़-ए-इलाही मस्जिद की इंतज़ामिया कमेटी नहीं चला रही थी. सरकारी ज़मीन पर कब्ज़े से कमाई के आरोप जामा मस्जिद के शाही इमाम पर भी लगे हैं. फ़ैज़-ए-इलाही मस्जिद की तरह सरकारी ज़मीन पर मेडिकल सेंटर, पार्किंग और दुकानें लगाकर अवैध वसूली करने का आरोप है. आज जब ज़ी न्यूज़ की टीम जामा मस्जिद पहुंची तो चारों तरफ़ अतिक्रमण नज़र आया.
हाईकोर्ट ने दिल्ली MCD से कहा अगर अतिक्रमण सही है तो एक्शन लें
मस्जिद के बाहर अतिक्रमण की कड़ी में अब एक और नाम जुड़ गया है. दिल्ली की डिफेंस कॉलोनी इलाक़े में बावली मस्जिद के बाहर भी अतिक्रमण पर कार्रवाई का निर्देश दिया गया है. हाईकोर्ट ने MCD से कहा है कि अगर अतिक्रमण के आरोप सही हैं तो कार्रवाई की जाए. स्थानीय लोगों का कहना है कि 16 साल पहले ये बहुत छोटी मस्जिद हुआ करती थी. लेकिन धीरे-धीरे इसका दायरा बढ़ता गया और अब ये रेलवे लाइन के नज़दीक तक पहुंच गई है. यहां कई अवैध निर्माण के भी आरोप हैं. फैज़-ए-इलाही मस्जिद की तरह अब जामा मस्जिद और बावली मस्जिद के बाहर भी अवैध अतिक्रमण पर बुलडोज़र चल सकता है. सवाल है कि अवैध कब्ज़े का ये मॉडल दिल्ली की कितनी मस्जिदों के बाहर चल रहा है. 3 मामले तो सामने आ गए हैं, बाक़ी और कितने अवैध कब्ज़े हैं.
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