
Attacks on Christian families in Nabarangpur: ओडिशा के नबरंगपुर जिले के कापेना गांव में धार्मिक तनाव की स्थिति बन गई है. यहां ईसाई समुदाय के लोगों ने आरोप लगाया है कि उन्हें प्रार्थना करने से रोका गया, उनके साथ बदसलूकी की गई और चर्च में बंद तक कर दिया गया है. इस घटना से गांव में डर और बेचैनी का माहौल है. पीड़ितों का कहना है कि यह सब उनकी आस्था को छोड़ने के दबाव में किया गया है.
धर्म नहीं छोड़ेंगे तो चर्च तोड़ दिया जाएगा
स्थानीय लोगों के मुताबिक 25 जनवरी को कुछ असामाजिक तत्व गांव पहुंचे और प्रार्थना सभा में बाधा डाली है. उन्होंने करीब 30 आदिवासी ईसाई परिवारों को धमकाया कि अगर वे अपना धर्म नहीं छोड़ेंगे तो चर्च तोड़ दिया जाएगा और उन्हें गांव से बाहर कर दिया जाएगा. आरोप है कि इन लोगों ने लाउडस्पीकर का इस्तेमाल कर खुलेआम धमकियां दी हैं. जब प्रार्थना कर रहे लोगों ने इसका विरोध किया, तो चर्च को बाहर से बंद कर दिया गया और सभी को जबरन बाहर निकाल दिया गया.
घटना के बाद हालात और बिगड़ गए. सोमवार को समुदाय के दो युवक, 17 वर्षीय जलधर सांता और 20 वर्षीय मोहन सांता, पर कथित तौर पर हमला किया गया. ईसाई समुदाय का कहना है कि युवकों के साथ मारपीट की गई और उन्हें डराने की कोशिश की गई है. इसके बाद समुदाय के लोगों ने उमरकोट थाने में शिकायत देने की बात कही है. हालांकि पुलिस का कहना है कि उन्हें अब तक कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है. फिर भी स्थिति की गंभीरता को देखते हुए गांव में सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए हैं.
विवादित भूमि पर बनी है चर्च
नबरंगपुर के जिलाधिकारी महेश्वर स्वाइन ने बताया कि विवाद को शांत करने के लिए दोनों पक्षों के लोगों को शामिल कर एक शांति समिति बनाई गई है. गांव में उप-जिलाधिकारी प्रकाश कुमार मिश्रा की निगरानी में बैठक भी हुई. प्रशासन के अनुसार जिस जगह प्रार्थना हो रही थी, वह कथित रूप से विवादित भूमि पर बनी थी. इसी बात को लेकर गांव के कुछ लोगों ने आपत्ति जताई थी. शांति समिति के फैसले के तहत प्रार्थना स्थल को दूसरी जगह ले जाने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है. साथ ही दोनों पक्षों से आपसी भाईचारा बनाए रखने की अपील की गई है.
यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब ओडिशा के ढेंकनाल जिले में भी कुछ दिन पहले एक पादरी के साथ सार्वजनिक रूप से मारपीट और उत्पीड़न का मामला सामने आया था. राष्ट्रीय क्रिश्चियन मोर्चा की ओडिशा इकाई के महासचिव पल्लव लीमा ने कहा कि ऐसी घटनाएं जानबूझकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश लगती हैं. उनका कहना है कि नबरंगपुर के मामले में आदिवासियों को ही आदिवासियों के खिलाफ खड़ा किया जा रहा है. प्रशासन का कहना है कि हालात पर नजर रखी जा रही है और गांव में शांति बनाए रखने के लिए हर जरूरी कदम उठाए जाएंगे.
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