
Kumaraswamy to Shivakumar: कर्नाटक की राजनीति में इन दिनों गरमाई हुई है. पहले पांच साल मुख्यमंत्री के पद को लेकर कांग्रेस में अब दूसरी पार्टी के नेता से. जिसमें एक तरफ हैं कांग्रेस के बड़े नेता और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार हैं, तो दूसरी तरफ जेडीएस के दिग्गज व केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी. दोनों के बीच जुबानी वार चल रहे हैं, जो अब काफी व्यक्तिगत हो गए हैं.
शिवकुमार ने पहले बोला कुमारस्वामी पर हमला
अब इस मामले को समझते हैं असल में बात की शुरुआत तब हुई जब डीके शिवकुमार ने कहा कि कुमारस्वामी की हरकतों को देखते हुए लगता है कि जनता दल (सेक्युलर) जल्द ही भारतीय जनता पार्टी में विलय हो जाएगी. उन्होंने ये भी दावा किया कि उनके पास प्रशासनिक अनुभव कुमारस्वामी से ज्यादा है. शिवकुमार बोले, “मैं मुख्यमंत्री नहीं बना, लेकिन मुझे पता है किसे फोन करना है, क्या करना है और काम कैसे करवाना है. मुझे कुमारस्वामी से कुछ सीखने की जरूरत नहीं.” है.
कुमारस्वामी का करारा जवाब
शिवकुमार के इस बयान पर कुमारस्वामी भड़क गए. उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर लंबा पोस्ट लिखकर पलटवार किया. उन्होंने कहा, “डीके शिवकुमार जी, हमारी पार्टी के विलय की चिंता छोड़िए. चलिए, मेरे और आपके प्रशासनिक अनुभव की बात करते हैं. मैं दो बार हालांकि छोटे कार्यकाल के लिए मुख्यमंत्री रहा, विपक्ष का नेता बना और अब केंद्रीय मंत्री हूं. आप भी लंबे समय से विधायक हैं, कई बार मंत्री बने और अब डिप्टी सीएम हैं. अनुभव की बात हम दोनों नहीं, जनता तय करेगी.”
कब्जा करना तो शिवकुमार के लिए आसान
फिर कुमारस्वामी ने तंज कसते हुए लिखा, “लूट, वसूली, फेंसिंग स्कैम, स्क्वायर फुट के हिसाब, कमीशन, फिक्सिंग और जबरन पैसे वसूलना – ये सब मेरे अनुभव का हिस्सा नहीं हैं, मिस्टर डीके शिवकुमार.” उन्होंने आगे कहा कि वे तो हमेशा लोगों की मदद करने की कोशिश करते रहे, लेकिन शिवकुमार जैसा ‘विशाल अनुभव’ उनके पास नहीं है. जमीन हड़पना और दूसरे मंत्रियों के पोर्टफोलियो पर कब्जा करना तो शिवकुमार के लिए आसान है.
बल्लारी मीटिंग पर विवाद
कुमारस्वामी ने बल्लारी में पुलिस अधिकारियों की मीटिंग का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने सवाल किया कि गृह मंत्री के क्षेत्र में आने वाला काम डिप्टी सीएम क्यों कर रहे थे? “बल्लारी में पुलिस मीटिंग गृह मंत्री या मुख्यमंत्री को करनी चाहिए थी. आपका ये करना प्रोटोकॉल का उल्लंघन है. क्या गृह मंत्री सिर्फ रबर स्टैंप हैं?” कुमारस्वामी ने पूछा कि क्या शिवकुमार ने कोई संवैधानिक संशोधन कर लिया कि वे दूसरे के विभाग में दखल दे सकें?
दोनों तरफ के दावे
शिवकुमार का कहना है कि जेडीएस-बीजेपी विलय से कांग्रेस को फायदा होगा, क्योंकि फिर सीधा मुकाबला दो पार्टियों के बीच होगा. वहीं कुमारस्वामी इन आरोपों को खारिज करते नजर आ रहे हैं. कर्नाटक में ये जुबानी जंग आगे और तेज हो सकती है, क्योंकि लोकल बॉडी इलेक्शन नजदीक हैं. अब सभी इन दोनों पर नजरें टिकाएं हैं कि आखिर अब आगे क्या?

