
Jammu And Kashmir: जम्मू के सुंदरबनी सेक्टर में 19 फरवरी को पाकिस्तानी आतंकियों की घुसपैठ की कोशिश नाकाम होने के बाद पूरे इलाके में व्यापक तलाशी अभियान लगातार जारी है. भारतीय सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियां जमीन के साथ-साथ हवाई निगरानी भी कर रही हैं. इसी कड़ी में सेना के हेलीकॉप्टर के जरिए भी संदिग्ध इलाकों में सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है, ताकि घुसपैठ करने वाले आतंकियों के संभावित ठिकानों का पता लगाया जा सके.
तलाशी अभियान के दौरान सेना को आतंकियों द्वारा छोड़ा गया भारी मात्रा में हथियार और अन्य सामान बरामद हुआ है. बरामद सामग्री में एक AK-47 राइफल, दो मैगजीन, बड़ी मात्रा में जिंदा कारतूस, तीन रकसैक बैग, राशन और कपड़े शामिल हैं. इसके अलावा इलाके में खून के निशान भी मिले हैं, जिससे साफ संकेत मिलता है कि सेना की जवाबी कार्रवाई में आतंकी घायल हुए हैं और भागने में सफल रहे. सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, बरामद हथियार और सामान इस बात की ओर इशारा करते हैं कि आतंकी किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने की फिराक में थे, जिसे सेना ने समय रहते नाकाम कर दिया.
क्यों आतंकियों की पहली पसंद बनता है ये रूट?
दरअसल, सुंदरबनी सेक्टर से सटा खौड़ और बट्टल इलाका छंब सेक्टर के अंतर्गत आता है और यह लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) के बेहद करीब स्थित है. यह इलाका ऐतिहासिक रूप से भी बेहद संवेदनशील रहा है और 1947 से लेकर अब तक हुए सभी भारत-पाकिस्तान युद्धों का गवाह रहा है.
जानकारी के मुताबिक, इस इलाके की भौगोलिक बनावट आतंकियों के लिए अनुकूल मानी जाती है. पूरा क्षेत्र घने जंगलों, ऊंची-नीची पहाड़ियों और गहरी घाटियों से घिरा हुआ है. इसके बीच से बहने वाली मुन्नवर तवी नदी आतंकियों को प्राकृतिक कवर प्रदान करती है. नदी, जंगल और पहाड़ियों का यह संयोजन घुसपैठ के बाद आतंकियों को छिपने और आगे बढ़ने में मदद करता है.
यही रूट आगे चलकर राजौरी जिले के सुंदरबनी और नौशेरा इलाकों से होते हुए रियासी और पीर पंजाल की पहाड़ियों से पूंछ तक पहुंचता है. इसके बाद आतंकी मुगल रोड के जरिए पीर की गली होते हुए दक्षिण कश्मीर के शोपियां और आसपास के इलाकों तक पहुंचने की कोशिश करते हैं. सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस पूरे कॉरिडोर का इस्तेमाल आतंकी कश्मीर घाटी में दाखिल होकर बड़ी आतंकी वारदातों को अंजाम देने के लिए करते हैं.
पहले भी हो चुकी हैं घुसपैठ की कोशिशें
यह पहली बार नहीं है जब आतंकियों ने इस रूट को चुना हो. इससे पहले अक्टूबर 2024 में भी इसी बट्टल के इलाके से तीन पाकिस्तानी आतंकियों ने घुसपैठ की कोशिश की थी. उस दौरान दो दिन तक चले एनकाउंटर में सेना ने तीनों आतंकियों को मार गिराया था और उनके पास से भी भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक बरामद किए गए थे.
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इसके अलावा भी समय-समय पर पाकिस्तान की तरफ से इस सेक्टर में घुसपैठ और फायरिंग की कोशिशें होती रही हैं, लेकिन भारतीय सेना और सुरक्षा बल लगातार मुस्तैदी से इन नापाक मंसूबों को नाकाम कर रहे हैं. फिलहाल पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन जारी है और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं, ताकि घुसपैठ की किसी भी कोशिश को पूरी तरह विफल किया जा सके.

