
News of protest against New Babri Masjid: आज से ठीक तीन दिन बाद मुर्शिदाबाद में नई बाबरी के निर्माण शुरू करने का ऐलान हुमायूं कबीर ने किया है. वहीं मुर्शिदाबाद चलो की अपील वाले पोस्टर लखनऊ में लगने शुरू हो चुके हैं. सवाल है कि क्या होगा 11 फरवरी को मुर्शिदाबाद में ? उस दिन हिंदू संगठनों ने पोस्टरों के जरिए खुल्लम-खुल्ला ऐलान किया है कि वो नई बाबरी नहीं बनने देंगे. वहीं इधर हुमायूं कबीर ने भी ऐलान कर दिया है देखें उन्हें कौन रोकता है.
‘हुमायूं हम आएंगे’, ‘बाबरी फिर से गिराएंगे’, ‘बंटोगे तो कटोगे’, ‘चलो मुर्शिदाबाद 10 फरवरी’. इस होर्डिंग्स पर लिखे शब्द पूरे लखनऊ में गूंज रहे हैं . 10 फरवरी की तारीख मुकर्रर कर उस दिन हिंदुओं से उस मुर्शिदाबाद पहुंचने की अपील की गई है जहां नई बाबरी मस्जिद का निर्माण हो रहा है.
नई ‘बाबरी’ पर माहौल गरम
पूरे लखनऊ में चौक चौराहों पर यही होर्डिंग्स लगाए गए हैं. लखनऊ के 1090 चौराहा, अंबेडकर चौराहा, हजरत गंज चौराहे के साथ साथ शहर के अलग अलग हिस्सों में होर्डिंग्स और पोस्टर चिपक चुके हैं. ऐसा लग रहा है विश्व हिंदू रक्षा परिषद ने मुर्शिदाबाद कूच की पूरी तैयारी कर ली है. इस पोस्टर पर लिखे शब्द ही बाबरी पर नए विवाद से मचने वाले कोहराम की आशंका पैदा कर रहे हैं. पोस्टर पर पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी की भी तस्वीर लगी है. यानी हिंदू संगठन नई बाबरी के निर्माण में सीधे-सीधे ममता बनर्जी को भी बराबर का शरीक मान रहे हैं.
अयोध्या में दफ्न हो चुकी बाबरी को मुर्शिदाबाद में जिंदा कर हुमायूं कबीर ने एक ऐसे विवाद को जन्म दे दिया है जिसके नासूर बनने की पूरी आशंका है. लखनऊ के ये पोस्टर इसी की तस्दीक कर रहे हैं.
लखनऊ में दिख रहा मुर्शिदाबाद का साइड इफेक्ट
हिंदू-मुसलमान के बीच की खाई चौड़ी कर हुमायूं कबीर मुर्शिदाबाद में जिस मुस्लिम वोट बैंक पर कब्जे की ख्वाहिश सजा रहे हैं उसी का साइड इफेक्ट लखनऊ में लगे ये पोस्टर हैं. इस अपील पर सनातिनयों का जत्था मुर्शिदाबाद मार्च करता है तो फिर क्या होगा.
हुमायूं कबीर ने 11 फरवरी की तारीख तय की है. जब मस्जिद के पत्थरों को जोड़ने का काम शुरू होना है और लखनऊ के ये पोस्टर 10 फरवरी को मुर्शिदाबाद चलो की अपील कर रहे हैं. मतलब बिल्कुल साफ है कि 11 फरवरी को मस्जिद निर्माण के साथ ही सांप्रदायिकता की चिंगारी सुलग सकती है.
चिंगारी देने ओवैसी भी पहुंच रहे बंगाल
लखनऊ की सड़कों पर लगे पोस्टर गवाही दे रहे हैं कि अब लड़ाई सिर्फ बंगाल की नहीं रही. सवाल फिर वही कि 11 फरवरी को मुर्शिदाबाद में क्या होगा. जैसा कि ऐलान है कि इस दिन बाबरी मस्जिद के निर्माण का काम ही सिर्फ शुरू नहीं होगा. इस दिन हैदाराबाद वाले भड़काऊ भाईजान ओवैसी भी मुर्शिदाबाद पहुंच रहे हैं.
बेशक 11 फरवरी को हुमायूं कबीर ओवैसी की पार्टी के साथ मिलकर पश्चिम बंगाल में मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण करने की कोशिश में नये सियासी साज पर नया तराना सुनाने वाले हैं. लेकिन इस नए सुर का जो साइड इफेक्ट होगा वो पश्चिम बंगाल ही नहीं बल्कि यूपी, एमपी, बिहार को भी लपेटे में ले सकता है.
जिस खेला के लिए बाबरी का हुमायूं कबीर इस्तेमाल कर रहे हैं. उससे देश में सांप्रदायिक सौहार्द के बीच हिंदू-मुस्लिम वाला खेला होने की पूरी आशंका दिख रही है. लखनऊ में लगे इन पोस्टरों का हिंदू समुदाय पर बड़ा इंपैक्ट हो सकता है.
(लखनऊ से विशाल रघुवंशी के साथ ब्यूरो रिपोर्ट)

