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Rajya Sabha Elections: चुनाव आयोग ने 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया है. 16 मार्च को देश के 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों पर होने वाले चुनाव ने सियासी हलचल तेज कर दी है. इस चुनावी मुकाबले में जहां राष्ट्रीय दलों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेसको बढ़त मिलती दिख रही है, वहीं कई क्षेत्रीय दलों के लिए यह परीक्षा की घड़ी साबित हो सकती है. बदलते विधानसभा समीकरणों ने राज्यसभा की अंकगणित को काफी हद तक उलझा दिया है, जिसके चलते राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को फायदा और विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया ब्लॉक’ के घटक दलों को संभावित नुकसान होने का अनुमान है.

37 सीटों पर होगी कांटे की टक्कर

राज्यसभा की 37 सीटों में से महाराष्ट्र की 7, तमिलनाडु की 6, बिहार और पश्चिम बंगाल की 5-5, ओडिशा की 4, असम की 3, हरियाणा, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना की 2-2 तथा हिमाचल प्रदेश की 1 सीट शामिल है. मौजूदा स्थिति में इन सीटों में से 15 एनडीए के पास, 18 इंडिया ब्लॉक के पास और 4 अन्य दलों के पास हैं. हालांकि हालिया विधानसभा चुनावों और दलबदल के बाद बदले समीकरणों से तस्वीर बदलती नजर आ रही है.

राजनीतिक आकलनों के मुताबिक एनडीए की सीटें 15 से बढ़कर 18 तक पहुंच सकती हैं जबकि इंडिया ब्लॉक की संख्या 18 से घटकर 14 या 15 पर सिमट सकती है. इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर उन क्षेत्रीय दलों पर पड़ सकता है जिनकी विधानसभा में संख्या अब पहले ज्यादा घट चुकी है.

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क्षेत्रीय दलों पर बढ़ेगा दबाव

बता दें कि मौजूदा 37 सीटों में बीजेपी के पास 9, जेडीयू के पास 2, एआईएडीएमके के पास 1, आरएलएम और आरपीआई के पास एक-एक सीट है. अनुमान है कि चुनाव के बाद बीजेपी की संख्या 9 से बढ़कर 12 तक हो सकती है. जेडीयू और एआईएडीएमके अपनी सीटें बरकरार रख सकती हैं.

वहीं इंडिया ब्लॉक की 18 सीटों में कांग्रेस, टीएमसी और डीएमके के पास 4-4 सीटें, आरजेडी के पास 2 और शिवसेना (UBT) व सीपीएम के पास एक-एक सीट है. नए समीकरणों के तहत कांग्रेस को एक सीट का फायदा मिल सकता है लेकिन आरजेडी, शरद पवार की एनसीपी (SP) और उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) के लिए राह मुश्किल मानी जा रही है. ममता बनर्जी की टीएमसी (TMC) और तमिलनाडु की डीएमके (DMK) अपनी स्थिति संभालने में सक्षम दिख रही हैं.

बिहार में RJD के लिए बड़ी चुनौती

बिहार की 5 सीटों पर मुकाबला बेहद दिलचस्प है. राज्य विधानसभा में एनडीए के पास 202 विधायक हैं, जबकि महागठबंधन के पास 35 और 7 अन्य विधायक हैं. राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 41 विधायकों का समर्थन जरूरी है. इस गणित के अनुसार एनडीए 4 सीटें आसानी से जीत सकता है. पांचवीं सीट के लिए उसे केवल तीन अतिरिक्त विधायकों की जरूरत होगी. दूसरी ओर, महागठबंधन अपने मौजूदा 35 विधायकों के साथ एक सीट भी जीतने की स्थिति में नहीं दिख रहा. उसे कम से कम छह अतिरिक्त वोटों की आवश्यकता होगी.

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इस लिहाज से लालू प्रसाद यादव की आरजेडी के लिए एक भी सीट जीतना चुनौतीपूर्ण हो गया है. अगर विपक्ष एकजुट होकर रणनीति बनाए तो मुकाबला रोचक हो सकता है, लेकिन एआईएमआईएम और बसपा जैसे दलों की अलग राह ने विपक्षी गणित को और जटिल बना दिया है.

महाराष्ट्र में पवार-उद्धव के लिए राज्यसभा चुनाव बना अग्निपरीक्षा

वहीं अगर महाराष्ट्र की बात करें तो महाराष्ट्र की 7 सीटों पर मुकाबला सबसे ज्यादा चर्चा में है. यहां एक सीट जीतने के लिए 37 विधायकों का समर्थन चाहिए. 284 सदस्यीय विधानसभा में बीजेपी के पास 131, एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना के पास 57 और अजित पवार गुट की एनसीपी के पास 40 विधायक हैं. यानी एनडीए के कुल 228 विधायक हैं.

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इस संख्या के आधार पर एनडीए 6 सीटें आसानी से जीत सकता है. माना जा रहा है कि बीजेपी 4 और शिंदे व अजित पवार गुट को एक-एक सीट मिल सकती है. दूसरी ओर, शरद पवार गुट की एनसीपी के 10, उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना (UBT) के 20 और कांग्रेस के 16 विधायक हैं. ये तीनों मिलकर एक उम्मीदवार को जिता सकते हैं, लेकिन उन्हें एक अतिरिक्त वोट की जरूरत पड़ेगी.

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स्थिति यह है कि अगर शरद पवार खुद राज्यसभा में वापसी चाहते हैं तो महाविकास अघाड़ी को एकजुट रणनीति बनानी होगी. उद्धव ठाकरे की पार्टी भी सीट पर दावा जता रही है. ऐसे में दोनों में से किसी एक को समझौता करना पड़ सकता है. महाराष्ट्र में यह चुनाव महाविकास अघाड़ी के लिए सियासी इम्तिहान जैसा बन गया है.

पश्चिम बंगाल में लेफ्ट की बढ़ी मुश्किलें

पश्चिम बंगाल की 5 सीटों में से चार पर टीएमसी मजबूत स्थिति में है. लेकिन एक सीट पर सीपीएम को नुकसान हो सकता है. अनुमान है कि यह सीट बीजेपी के खाते में जा सकती है. ऐसा होने पर राज्यसभा में बंगाल से वामदलों का प्रतिनिधित्व खत्म हो जाएगा.

तेलंगाना में बीआरएस के लिए कठिन समय

तेलंगाना की दो सीटों पर कांग्रेस को बढ़त मिलती दिख रही है. इससे भारत राष्ट्र समिति (BRS) को अपनी मौजूदा सीट गंवानी पड़ सकती है. यदि ऐसा हुआ तो राज्यसभा में बीआरएस का प्रतिनिधित्व भी समाप्त हो जाएगा.

ओडिशा में बीजेडी को लग सकता है झटका

ओडिशा की चार सीटों में से बीजेपी तीन सीटें जीत सकती है. बीजू जनता दल (BJD) को एक सीट से संतोष करना पड़ सकता है. इससे बीजेडी को दो सीटों का नुकसान उठाना पड़ सकता है.

तमिलनाडु में डीएमके मजबूत

तमिलनाडु की 6 सीटों में डीएमके चार सीटें जीत सकती है, जबकि एआईएडीएमके एक सीट सुरक्षित रख सकती है. एक सीट पर मुकाबला रोचक हो सकता है. यहां डीएमके की स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत मानी जा रही है.

असम, हरियाणा और हिमाचल में भी कांटे की टक्कर

असम की 3 सीटों में बीजेपी दो सीटें बरकरार रख सकती है, जबकि असम गण परिषद को नुकसान उठाना पड़ सकता है. हरियाणा की दो सीटों में से एक-एक सीट बीजेपी और कांग्रेस के खाते में जाने का अनुमान है. इससे बीजेपी को एक सीट का नुकसान हो सकता है. हिमाचल प्रदेश की एक सीट पर कांग्रेस बढ़त बना सकती है, जिससे बीजेपी को झटका लग सकता है.

क्या कहता है छत्तीसगढ़ का समीकरण

छत्तीसगढ़ की दो सीटों में से एक बीजेपी और एक कांग्रेस के खाते में जा सकती है. हालांकि यहां कांग्रेस को भी एक सीट का नुकसान होने की संभावना जताई जा रही है. कुल मिलाकर राज्यसभा चुनाव का यह दौर राष्ट्रीय राजनीति में संतुलन बदल सकता है. एनडीए को जहां कुल मिलाकर 3 सीटों का लाभ मिल सकता है, वहीं इंडिया ब्लॉक की संख्या घटने की संभावना है. खासकर आरजेडी, एनसीपी (SP), शिवसेना (UBT), बीआरएस और वाम दलों के लिए यह चुनाव अस्तित्व की लड़ाई जैसा बन गया है.

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जिसके कारण इन चुनावों का असर न केवल राज्यसभा की संख्या पर पड़ेगा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर विधायी रणनीति, विधेयकों के पारित होने और गठबंधन राजनीति की दिशा पर भी प्रभाव डालेगा. 16 मार्च को होने वाला मतदान यह तय करेगा कि ऊपरी सदन में किसकी ताकत बढ़ेगी और किसकी सियासी जमीन और सिकुड़ेगी.